Sunday, November 6, 2011

कभी न होगी कोई ग्रह पीड़ा..बस, शनिवार की शाम पीपल के नीचे बोलें यह मंत्र

ईश्वर की विराटता से जुड़ी हिन्दू धर्म मान्यताओं में ग्रह-नक्षत्र भी देव स्वरूप माने गए हैं। प्रतिदिन सूर्य-चंद्र का प्रभाव सृष्टि व जीवन पर प्रत्यक्ष देखा भी जाता है। इसी तरह अन्य ग्रह-नक्षत्रों का जीवन पर शुभ-अशुभ प्रभाव सुख-दु:ख नियत करने वाला माना गया है। इसलिए नवग्रह पूजा या दोष शांति का कामनासिद्धि के लिये विशेष महत्व बताया गया है।

खासतौर पर ज्योतिष शास्त्रों में इन ग्रह-नक्षत्रों की चाल और दृष्टि सांसारिक जीवन में लाभ-हानि का कारण मानी गई है। नवग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु का अच्छा-बुरा असर जीवन में दरिद्रता या ऐश्वर्य को नियत करने वाला माना गया है।

यही कारण है कि शास्त्रों में ग्रह उपासना लिए एक ऐसा उपाय भी बताया गया है, जो सभी ग्रह दोषों से मुक्त करने के साथ उनके बुरे प्रभावों से मिलने वाले रोग, कष्ट, दरिद्रता या नाकामियों को दूर कर जीवन भर हर ग्रह पीड़ा से मुक्त रखने वाला भी होता है।

यह उपाय है हर शनिवार की शाम पीपल के वृक्ष के नीचे बैठ विशेष ग्रह पीड़ा मुक्ति मंत्र का स्मरण। देव वृक्ष पीपल की पूजा ग्रह दोष व दरिद्रता का अंत करने वाली मानी गई है। इसलिए जानते हैं इससे जुड़ी आसान विधि -

- शनिवार की शाम पीपल की जड़ में गाय का दूध मिला जल, चंदन व काले तिल अर्पित करें। मिठाई का भोग के रूप में चढाएं।

- बाद उसके नीचे कुश आसन पर बैठ गोघृत का दीप व धूप जलाएं और नीचे लिखें मंत्र विशेष का 108 बार रुद्राक्ष या चन्दन के  दानों की माला से जप करें। इस मंत्र में अमुक शब्द के स्थान पर ग्रह पीडि़त परिजन, स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति का नाम लें।

ऊँ नमो भास्कराय (अमुक) सर्व ग्रहणां पीड़ा नाश कुरु कुरु स्वाहा।

- मंत्र जप के बाद त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश की आरती कर मंगल की कामना करें।